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May 19th, 2012
Puneet Verma Lines Pe Meri Hanste Hanste, Moti Tere Teeth Ho Gaye
May 19th, 2012
Puneet Verma Mughko Wo Awaaj Ab, Nayi Nayi Si Lagti Hai
May 19th, 2012
Puneet Verma मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
May 17th, 2012
Puneet Verma हलकी सी नाराज और, खोई खोई सी लगती है – मुघ्को ये दुनिया अब, सोयी सोयी सी लगती है
चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने – मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
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तुग्को पीछे छोड़कर, पाया मैंने लाखों को – दिल को अपने खोल दिया है,खोल दिया है आँखों को,
तेरी ये कहानी मुघ्को, कही कही सी लगति है – चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने
मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
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पल पल सबका चेहरा बदला ,मनोरंजन की इस दुनिया में – कलाकार भी नए मिले, दुखभंजन की इस दुनिया में
मुघ्को उसकी हाँ भी अब, नहीं नहीं सी लगती है – चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने
मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
April 27th, 2012
Puneet Verma गर्मी के इस मौसम में, हॉट माइंड भी शीत हो गए – मुख से तेरे जो भी निकले, बोल वही संगीत हो गए
काम में मैंने रूचि गवाई, लाइफ में मैंने रूचि गवाई – लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
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रुची का यूँ भंवर उठा है, शर्म का देखो कवर उठा है – खो कर तेरे सपनो में, सुबह सुबह ये लवर उठा है
लाइफ में मेरी एंटर करके , इतने क्यों तुम स्वीट हो गए – लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
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ग्रीन टेक में रूचि समाई, हर पल हमने नींद गवाई – एक बार जो तुघ्को देखा, दिल की हमने वाट लगाई
दिल को रख के फीट में तेरे, प्यार में तेरे बीट हो गए – लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया
April 24th, 2012
Puneet Verma 
ज्ञान के समंदर में, किताबों के मंदिर में – तेरा यूँ दीदार हुआ, मुघ्को तुघ्से प्यार हुआ
तुघ्को गीता मान कर, मैं तो गुड बॉय बन गया – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया
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पहला पन्ना खोल के मैं तो, तुघ्को अपना मान था बैठा – एक पृष्ठ के लेख को, मैं पूरी स्टोरी जान था बैठा
तुघ्को बेबी मान कर, मैं तो टॉय बन गया – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया
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तुघ्को साथ था लेकर चलता, वृन्दावन की गलिओं में – तेरी हंसी को कैद किया था, फूलों की इन कलिओं में
तुघ्को ग्वालन मान कर, मैं तो गाय बन गया – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया
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तू मिलती मुघ्को हर पल दिन में, रात को ख़्वाबों में – तू दिखती मुघ्को ऊपर नीचे, ऑनलाइन किताबों में
जीवन तुघ्को मान कर, मैं तो जोय बन गया – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया
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ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ
April 22nd, 2012
Puneet Verma घर से हूँ निकला , इबादत के विमान में – बस तेरा नाम लेके, खुशिओं के जहान में
मोह्हबत की बगिया में, मैं लड़ता हुआ जा रहा हूँ – ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ
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नीले अम्बर के साथ, और सुबह के आँचल में – ना ही शिमला में, ना ही उत्तरांचल में
दिल्ली की सड़क पर, मैं बढता हुआ जा रहा हूँ – ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ
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प्रेम पथ के किनारों पर , यूँ प्यार का लगा के बूटा – तेरी हंसी का ध्यान करके, अक्षरधाम है पीछे छूटा
मिशन ग्रीन की पोथी को, मैं पड़ता हुआ जा रहा हूँ – ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ
उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं
April 14th, 2012
Puneet Verma इस गहरे आकाश में, सूरज भी है चन्दा भी है – हम जैसा उल्का भी है, प्रथ्वी का कन्धा भी है
मंगल हो या बुध हो, सभी दोस्त हमारे हैं – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं
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हीरों की इस नगरी में, हसना सुबह शाम होगा – उल्का की इस जर्नी में , मेरा क्या अंजाम होगा
गंगा हो या जमुना हो, सबके दो किनारे हैं – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं
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अन्धकार में लेंस लगा के, उल्का का ये साइलेंस देखो – टाइम से आना टाइम से जाना, सबका अजब ये बैलेंस देखो
सर्दी हो या गर्मी हो, देखो मस्त बहारें हैं – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं
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कृतियों के ब्रह्माण्ड में, उल्का क्यों बदनाम है – पोएम के इस पाठक को, उल्का का प्रणाम है
बादल भी है बिजली भी है , बारिश की फुहारे हैं – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं
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Think Green with Jute Bags
April 7th, 2012
Puneet Verma 
जूट सबसे सस्ती प्राकृतिक रेशों में से एक है और कपास के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला पर्यावरण अनुकूल रेशा है. अगर जूट का इस्तेमाल हमारी दिनचर्या में होना शुरू हो जाए तो लाइफ सच में रोमांचक हो जाएगी. क्योंकि ऐसा करने से हमारा वातावरण हमे जो शुक्रिया और प्यार देगा, उससे हमारा मन और इश्वर दोनों ही प्रसन्न हो जाएंगे और हम परम शान्ति का अनुभव कर पाएंगे. अब आप सोच रहे होंगे की जूट कहाँ कहाँ काम आ सकेगा. तो सुनिए अपने लैपटॉप के बैग को, अपने ऑफिस के बैग को आप जूट से बने शीतल बैग से बदल सकते हैं. अगर घर में योग और ध्यान करते हैं तो जूट से बनी चटाई का इस्तेमाल कर सकते हैं. महिलाएं जूट से बड़े शोउल्डर बैगस का इस्तेमाल कर सकती हैं. और आज कल तो पर्यावरण के संदेशों के साथ जूट से बने बैग मार्केट में आ रहे हैं, जिन्हें इस्तेमाल करके आप जागरूकता फैला सकते हैं और इस तरह एक अच्छे नागरिक होने का फ़र्ज़ निभा सकते हैं. स्कूल जाने वाले बच्चे जूट से बने बैग का इस्तेमाल करके दुसरे बच्चों को जागरूक कर सकते हैं. शोपिंग के लिए हम सुन्दर प्रिंटेड कैर्री बैग ले जा सकते हैं. बल्कि आजकल तो अपने documents और फाइल्स को रखने के लिए, पानी की बोतल को कैरी करने करने लिए भी जूट से बने बैग आ रहे हैं. अपने घर को सुन्दर और शीतल बनाने के लिए आप जूट से बना furniture इस्तेमाल कर सकते हैं, अपने मेज, कुर्सी और बेड की सजावट जूट से बने नप्किन से कर सकते हैं. सच तो ये है की जूट की बात करने मात्र से मन प्रसन्न हो रहा है और जिंदगी खूबसूरत से प्रतीत हो रही है.
Samjha Maine Har Pal Ko
April 1st, 2012
Puneet Verma रूठ रूठ कर चेहरे से, चिंता की इक नदी बहा दी – सर्द भरी तन्हाई में, तेरी हंसी ने आग लगा दी
दिल तक उनके लेकर जाना, खुशिओं की इस बस्ती को – समझा मैंने हर पल को, हर पल की इस मस्ती को
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देख के अपनी शाखा को, दिल को अपने क्यों जलाए – छेड़ छेड़ के यादों को , मन को अपने क्यों रुलाए
आशा की इस नदिया में, पार लगा दो कश्ती को – समझा मैंने हर पल को, हर पल की इस मस्ती को
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क्रोध का प्याला पीते पीते, तन को तेरे क्या हो गया – अन्धकार को जीते जीते, मन को तेरे क्या हो गया
खुद से थोडा प्यार करो तुम, प्यार करो इस हस्ती को – समझा मैंने हर पल को, हर पल की इस मस्ती को













