ग्रीन टेक रेस्पॉन्सिव हो गयी

लीडस् नहीं मिलती हैं , जब  उज़र्स एक्सटेंसिव ना हो
बाउंस रेट बढ़  जाता है, जब वेबसाइट रेस्पोंसइव ना हो
इन्फो ग्राफ़िक का जमाना है, स्क्रॉल मोर हो जाता hai
अगर कंटेंट ज्यादा हो तो, यूजर बोर हो जाता है

कंटेंट फ्लो नहीं होता, गर वेबसाइट में फीड ना हो
यूजर फेसबुक पे चला जाता है, गर वेबसाइट में स्पीड ना हो
स्लइडर्स डिसएबल करके,फ्लैट डिज़ाइन मस्त लगता है
नेविगेशन फिक्स्ड ना हो तो, विज़िटर्स को कष्ट लगता है

पैसे देकर वेंडर को, ना तुम इतना क्राई करो अब
मिशन ग्रीन की पोएम पढ़ के , पारालैक्स स्क्रॉलिंग ट्राई करो अब
वही पुरानी साइट देखकर, दुनिआ सारी पेन्सिव हो गयी
जल्दी से अब कर लो ओपन, ग्रीन टेक रेस्पॉन्सिव हो गयी

पुनीत वर्मा की कलम से – मिशन ग्रीन दिल्ली ब्लॉग

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छेदी साम्राज्य का सच : भगवान कृष्ण से सम्राट अशोक तक

शिशुपाल भगवान कृष्ण के अंकल का पुत्र था. शिशुपाल छेदी साम्राज्य का राजा भी था. भीम और नकुल की पत्नियां भी छेदी साम्राज्य से ही थी।   छेदी साम्राज्य में आगे चलकर राजा वासु हुए, जो एक कुरु वंशज थे।  उनके  सबसे बड़े बेटे बृद्धरथ हुए जो मघद देश के पहले राजा हुए। बृदरथ वंश में चौबीस राजा हुए।  बृदरथ वंश के आखिरी राजा रिपुंजय को उनके मंत्री सुनिका या पुलिका ने मार डाला।

जब पुलिका ने राजकुमार प्रद्योता को उज्जैन के सिंहासन पे बिठाया, उसी समय बृद्धरथ वंश/चन्द्रवंश की समाप्ति हुई थी। उज्जैन के पहले राजा विक्रमादित्य भारत के भी पहले  राजा माने जाते हैं। कहा जाता है की राजा परीक्षित के वंश और राजा जरासंध के वंश की समाप्ति भी इसी समय हुई थी।

हर्यंका सम्राट बिम्बिसार भगवान बुद्ध के मित्र और रक्षक थे। राजा शिशुनाग ने प्रद्योता वंश के आखिरी राजा नंदीवर्धन को हराया और हर्यंका वंश(जिसका आखिरी राजा नगदसाका था जिसने अपने पूर्वजों  बिम्बिसार और अजातशत्रु की तरह ही अपने पिता मुंडा की  हत्या कर दी थी ) को भी समाप्त कर दिया। हर्यंका वंश के समाप्त होने पर शिशुनाग वंश की शुरुआत हुई। महानदिन शिशुनाग वंश के आखिरी राजा थे।  इनके और शूद्र माता के पुत्र  महा पदम नन्द हुए जिन्होंने नन्द वंश की शुरुआत की।  जब ८८ वर्ष में उनकी मृत्यु हुई तो उनके क्रूर पुत्र धना नन्द ने राज्य को संभाला।  चन्द्र गुप्त मौर्या ने, जो एक नन्द राजकुमार और एक दासी  के पुत्र थे, चाणकय, सिकंदर  और अन्य राजाओं की मदद से नन्द वंश को समाप्त कर दिया और मौर्या वंश की शुरुआत की। चन्द्र गुप्त मौर्य ने सिकंकर के मंत्री की बेटी से विवाह किया और बिन्दुसार पैदा हुए।  मौर्या वंश में आगे चलकर बिन्दुसार और सम्राट अशोक जैसे राजा हुए।

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