भारत की खेती

लेश्चर कहता है की भारत का कृषि सिस्टम दुनिआ में सबसे बेस्ट है। बिना यूरिया और सुपर फॉस्फेट के ही उस समय एक एकर में छप्पन क्विंटल धान निकलता था। एक एकर में ही एक सौ बीस मीट्रिक टन गाना निकलता था। अट्ठारह सौ बाइस में एक लाख प्रकार के धान और एक लाख प्रकार के बीज भारत में पाए और उगाए जाते थे। खेती के औजार भारत में सबसे पहले बनाए गए जो पूरी दुनिआ ने इस्तेमाल किये। एक पंक्ति में बीज बोना भारत ने सिखाया। अंग्रेजों ने सत्रह सौ पचास में भारत में खेती सीखी। इससे पहले वो केवल जंगली खाना और मांस पर निर्भर थे। ग़ुड और गुड्डिया शकर भारत सौ साल पहले सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता था। भारत की शिक्षा और चिकित्सा सर्वोत्तम स्तर की थी। मोतियाबिंद का ऑपरेशन भारत में सबसे पहले किया गया। ये रॉयल सोसाइटी ऑफ़ इंग्लैंड भी मानती और बताती है।

लेकिन फिर भारत में गुरुकुल बंद कराने के लिए इंडियन एजुकेशन एक्ट को लाया गया। इंडियन गुड्स पे हाई टैक्स कर दिया गया और फॉरेन गुड्स को टैक्स फ्री कर दिया गया। लैंड अकुशन एक्ट लाया गया और किसानों पे नब्बे प्रतिष्ठत टैक्स लगाया गया। कलकत्ता में गाय कटाई शुरू हो गयी। इस तरह भारत का विनाश शुरू हो गया।

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डेड सौ साल पहले का भारतीय एडुकेशन सिस्टम

मैक्स म्युलर ने भारतीय शिक्षा पर रिसर्च की है। उसने देखा और बताया की भारतीय एजुकेशन दुनिआ में सबसे बेस्ट है। बंगाल प्रांत जिसमे बंगाल बिहार ओरिसा और अन्य भारतीय शहर भी आते थे, में अस्सी हज़ार से ज्यादा गुरुकुल पिछले हज़ार साल से चल रहे है और भारतीय बच्चे वहाँ शिक्षित हो रहे हैं। लुडलो ने सोलह सत्रह साल की रिसर्च के बाद बताया की भारत में कोई ऐसा गाँव नहीं है जहां गुरुकुल ना हो। नार्थ भारत में दोसो विद्यार्थिओं पर एक गुरुकुल होता है। लिटनेर भी अट्ठारह सौ बाइस में यही कहता है। बीस करोड़ की जनसंख्या में सात लाख बत्तीस हज़ार गाँव में सात लाख बत्तीस हज़ार गुरुकुल हैं जबकि अट्ठारह सौ अड़सठ में अंग्रेजो के पास कोई स्कूल नहीं है। दो हज़ार सात में जहां भारत पचास प्रतिष्ठत शिक्षित है वहीँ उनीसवीं सदी में भारत सत्तानवे प्रतिशत शिक्षित था। गुरुकुल राजा की कृपा की बजाए जनता के दान से चलते हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक अठारह विषय पढ़ाए जाते हैं।

शिक्षा देने के लिए संस्कृत भाषा का इस्तेमाल किया जाता है और वेदों द्वारा बच्चों को संस्कारी बनाया जाता है। बच्चा गुरुकुल में पांच साल पांच महीने की उम्र से चौदाह वर्ष की उम्र तक गुरकुल से मुफ्त शिक्षा लेता है, फिर चाहे वो गरीब हो या अमीर हो। पंगेरकास्ट कहता है बच्चे धातु , नक्षत्र , खगोल, भवन विज्ञान और धातुकरण की शिक्षा लेते हैं। दो हज़ार नौ में जहां पूरे भारत में तेरह हज़ार कॉलेज और चार सौ पचास विस्व विद्यालय हैं वहीँ सिर्फ अट्ठारह सौ बाइस में केवल मद्रास प्रांत में ग्यारह हज़ार पांच सौ पचत्तर कॉलेज और एक सौ नौ विश्व विद्यालय हैं। अट्ठारह सौ बाइस में चैदह हज़ार से ज्यादा कॉलेज हैं। इंग्लैंड और यूरोप में शिक्षा केवल राजा के बच्चों के लिए होती थी। अरस्तु और सुकरात ने भी यही कहा है।

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भारत का खगोल विज्ञान

सूर्य और धरती के बीच की दूरी कोपर्निकस के जन्म से हज़ार साल पहले आर्यभट ने नाप ली थी और इसकी जानकारी हमे यजुर्वेद के खगोल शास्त्र में मिलती है। नक्षत्र विज्ञान , दिनों के नाम , रात और दिन के समय आर्यभट ने डिसकवर कर दिए थे। धरती अपनी एक्सिस पे घूमती है ये आविष्कार दसवीं शताब्ती में हो गया था। सत्रह सौ आठ में डेनियल दिफ्फी बताते हैं कि भारतीय विज्ञानिक या खगोल शास्त्री कई वर्ष पहले ही सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण कि भविष्य वाणी कर देते हैं जो कि बिलकुल सही होती है।

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