Re-Engineering की आवश्यकता


January 8th, 2012
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आओ हम सब मिलकर उन सब समाधानों को एकत्रित करें जो हमारे इस दिल्ली शहर को सोने की चिड़िया में बदल दें. मिशन ग्रीन डेल्ही ब्लॉग हर technocrat को आमंत्रित करता है की वो आएं और हो सके तो अपनी मात्र भाषा को प्रयोग करते हुए उन मुद्दों को उठाएं जिनको अपने शहर में पुनरभियांत्रीकरण (Re -Engineering) की आवश्यकता है.  इस पुनरभियांत्रीकरण की जरुरत शहर में हर क्षेत्र में है फिर चाहे वो Education का क्षेत्र हो, चिकित्सा का क्षेत्र हो या फिर क़ानून का क्षेत्र हो. हम सब जब भी मिलते हैं या बात करते हैं तो एक दुसरे से कुछ सवाल करते हैं ? ये पेट्रोल की कीमत क्यों बढ रही है ? ये बिजली के रेट क्यों बढ रहे हैं ? ये खाने की चीजें क्यों महंगी हो गयी हैं ? ये गैस क्यों महंगी हो गयी ? और इन् सब का जिमेवार सरकार को बना देते हैं. लेकिन क्या हम कभी अपनी दिनचर्या पर विचार करते हैं ? क्या हम ब्रांडेड कपडे खरीदते वक़्त लाल बत्ती पर खड़े उस बच्चे के बारे में सोचते हैं जो इस सर्द ठण्ड में भी बिना कपड़ों के ठिठुर रहा है ?  हज़ारों रूपए bread , हॉट dog, chicken या मटन  पे खर्च करते वक़्त हमको सामने खड़े भूखे बचे नजर नहीं आते ? अगर हम सच में पेट्रोल और खाद्य पदार्थों को लेकर चिंतित हैं तो हमे आज और अभी से अपनी ये दिनचर्या बदलनी होगी. जो धन विदेशी झुकाव के कारण व्यर्थ हो रहा है उसकी बचत की तरफ ध्यान देना होगा और उसे अपने इस दिल्ली शहर में हरियाली और खुशहाली लाने में इस्तेमाल करना होगा जिससे दिल्ली के हर रोते हुए मासूम चहरे पे ख़ुशी आ सके. वाहन के इस्तेमाल में कमी करते हुए धन और वातावरण की रक्षा करनी चाहिए. कोयले, तेल और गैस के दाम बढ रहे है, जिससे उनसे उत्त्पादित होने वाली बिजली के दाम बढ रहे हैं.  धन का इस्तेमाल वातावरण को काला करने के लिए नहीं  बल्कि शहर को और सुन्दर बनाने के लिए करना है. बिजली की बचत करनी होगी और बिजली चोरी का ध्यान रखना होगा, ताकि अपने शहर में विधुत अवकाश ना हो सकें. ये में इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि जिस शहर में ऊर्जा अवकाश (Power Holidays) नहीं होते वो दुनिया में सबसे सम्रध शहर होता है और हमे भी ग्रीन initiative लेते हुए अपने दिल्ली शहर को सम्रद्धि की राह पर ले जाना है.

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