The Truth of Social Media Websites

आज का युवा अपना सबसे अधिक वक़्त कहाँ व्यतीत कर रहा है ? तो इसका जवाब है सोशल मीडिया वेब साइट्स पर. और ऐसा करते वक़्त हम पूरी तरह से अपने दुःख दर्द और ख़ुशी के भावों को टेक्स्ट, इमाज़ेस और वीडीओस के जरिये डाटाबेस में डाल रहे हैं. हमे क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं , इसका भी एक रिकॉर्ड बनता जा रहा है. हमे कौन पसंद है और कौन नहीं, ये भी डाटाबेस में रिकॉर्ड किया जा रहा है. इस तरह का डाटाबेस तैयार होने से हमे किसी भी व्यक्ति या ऑब्जेक्ट के बारे में जानकारी लेना आसान हो जाएगा. हम अगर एक सोशल मीडिया वेबसाइट चला रहे हैं और अगर उसका इस्तेमाल ये 70 प्रतिशत दुनिया रोज कर रही है तो हम अडवांस रिपोर्टिंग के जरिये ये जान लेंगे की कौन सा व्यक्ति क्या सोचता है, कैसे सोचता है, कहाँ रहता है, कहाँ काम करता है, उसके परिवार के लोग कौन हैं, उसके दोस्त कौन हैं, और वो क्या करने वाला है. ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो हम अपनी कुंडली खुद बनाने में लगे हुए हैं. इस डाटाबेस का सबसे बड़ा फायदा ये होगा की मार्केटिंग कंपनीयां सोशल मीडिया डाटाबेस की मदद से व्यक्ति की जरुरत को समझ पाएंगी और उनसे पूछे बगेर ही उनकी जरुरत की चीजें उनको बेच पाएंगी.

केवल इतना ही नहीं, अगर इस डाटाबेस का इस्तेमाल सामान बेचने के लिए किया जा सकता है , तो इसका इस्तेमाल रीसर्च करने के लिए भी हो सकता है. अगर हम लोगों की जरूरतों को समझ पाएंगे तो हम उनकी मुश्किलों को भी समझ पाएंगे. और इस तरह जब उनके जीवन में आ रही परेशानिओं को देख पाएंगे तो उसका उपाए करना आसान हो जाएगा.

बस चिंता इसी बात की है ये डाटाबेस किसी गलत हाथ में ना चला जाए. अगर ऐसा होगा तो कई तरह की परेशानिआँ भी आ सकती हैं. इधर सुरक्षा कंपनिया इसका इस्तेमाल जुर्म कम  करने के लिए कर रही हैं, तो उधर असामाजिक तत्व इसका इसका इस्तेमाल एक दुसरे को नुक्सान पहुंचाने के लिए कर सकते हैं. बस जरुरत है तो इस डाटाबेस को सुरक्षित रखने की.

आज गूगल और फेसबुक दुनिया के सबसे बड़े डाटाबेस हैं जो लोगों के बारे में हर जानकारी रखते हैं और बड़ी बड़ी सुरक्षा एजेनसिया इसका इस्तेमाल करके जुर्म और बिमारीआं समाप्त कर रहे हैं.

बस यही दुआ करता हूँ की इस डाटाबेस का इस्तेमाल दुनिया में शान्ति लाने के लिए हो. धन्यवाद.

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Losing Friends on Social Media ?

So finally your friendship ended with your long term friend due to little misunderstanding. Misunderstanding is something that is caused by shifting of trust due to some event or third party or third person. This can be easily understood by various situations. Like these days most of people loose trust on their friends just by watching their loved ones on social media. They interpret a person they know closely from childhood through an illusive lens of social media networking websites and internet and create a new negative perception about them which appears as jugglery effecting trust in human relationships. People start trusting software instead of human and forget that it is human being who created software and not software that is behind human. The best way to get your friends back is to avoid social networking websites till you completely understand their negative effects on your life. From one of my friend who is using facebook,  I found the following:

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Problem of Friend: His/Her mind was trapped under the web of some text he/she read on internet or social networking website. This jugglery expanded with time.
Result: Internet or Software Won …. Two friends lost their friendship
Solution: Never trust the text written on internet. Just talk to sort out issues.

Problem of Friend: I’m tired of comments being randomly deleted.
Solution: This appears to be a known issue, but it also appears as though Facebook isn’t giving it high priority. To report this, go to:
Account > Help Center > Report a bug > Profile and Wall > Content on my Facebook profile disappears and reappears. Click on “here” to submit a bug report.

Problem of Friend: People have disappeared from my friend list even though I did not remove them, and they did not remove me.

Solution: Friend removals are not caused by a technical error on the site, as it is not possible for a friend to be removed without confirmation from one of the use…

1. This person removed you from their friend list, either intentionally or accidentally.
2. This person has deactivated their account, causing them to disappear from all friend list. If they choose to reactivate their account, they will reappear on these lists.
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Delhi is for Everyone

दिल्ली में गाँव से जब एक व्यक्ति आता है तो ये शहर उसे कई तरह के मौके देता है. कभी कभी जब अच्छा मौक़ा नहीं भी मिल पाता है, तब वो व्यक्ति किसी छोटे व्यापार से शुरुआत करता है. ऐसे कई छोटे व्यापारी मिल जाएंगे जो दिल्ली शहर में अपने सपनों को पूरा करने की उम्मीद में जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं और अपना घर परिवार चला रहे हैं. जिंदगी ठीक ठाक चल रही है. लेकिन जब कोई उनके रोजगार और सपनों को तोड़ने की उम्मीद लेकर खडा हो जाता है, तब उनकी सहनशक्ति ख़तम हो जाती है और वो गेर कानूनी कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं.  क्या उनको अपनी परिवार के लिए कर्म करने का हक नहीं है ? क्या उनको सपने देखने का हक नहीं है ? क्या ये शहर उनका नहीं है ? सरकार द्वारा जब भी कोई कदम उठाया जाए, तो वो कदम इन वयापारिओं के परिवार को ध्यान में रख कर उठाया जाना चाहिए क्योंकि इस शहर पर एक आम व्यक्ति का उतना ही हक होता है जितना की बड़े वयापारिओं, नेताओं और पेशेवरों का . हर एक व्यक्ति जब कभी इस शहर में आया था तो उसने जमीन से ही अपने सपनों को पूरा करने की शुरुआत की थी और आज आसमान की बुलंदिओं को छुआ है. इसलिए हमे कोई हक नहीं बनता की हम इन् व्यापारिओं से उनका इस शहर पर हक छीने.

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